हजारीबाग : हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल से मुलाकात कर एनटीपीसी की कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों एवं विस्थापित परिवारों की समस्याओं, पुनर्वास नीति और मुआवजा व्यवस्था में सुधार को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में सांसद ने प्रभावित परिवारों के हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए कहा कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे और जल्द ही सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है, सांसद ने बताया कि मार्च 2026 में भी इस विषय पर ऊर्जा सचिव के साथ बैठक हुई थी, जिसमें प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन मिला था। इसी क्रम में क्षेत्र से प्राप्त सुझावों और शिकायतों को दोबारा रखते हुए उन्होंने पुनर्वास नीति में आवश्यक संशोधन का आग्रह किया।
बैठक में पकरी बरवाडीह, केरेडारी, चट्टी-बरियातू, पकरी बरवाडीह नॉर्थ वेस्ट तथा तलाई पल्ली कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के हितों को प्रमुखता से उठाया गया। सांसद ने कहा कि वर्तमान पुनर्वास नीति के कुछ प्रावधानों के कारण कई वास्तविक प्रभावित परिवार लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने भूमि अधिग्रहण की तिथि को पात्रता का आधार बनाने, सभी वैधानिक हिस्सेदारों को पुनर्वास लाभ देने, भूमि अधिग्रहण का मुआवजा ₹24 लाख प्रति एकड़ से बढ़ाकर ₹40 लाख प्रति एकड़ करने तथा 18 वर्ष से अधिक आयु के पात्र सदस्यों को मिलने वाली ₹10 लाख की विस्थापन सहायता बढ़ाकर ₹15 लाख करने की मांग की।
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि हजारीबाग देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में विकास और ऊर्जा उत्पादन के साथ अपनी जमीन देने वाले रैयतों एवं विस्थापित परिवारों के सम्मान, अधिकार और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऊर्जा मंत्रालय जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेते हुए हजारों प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत प्रदान करेगा।





